प्रोजेक्ट MKUltra
🏛️ आधिकारिक अभिलेख
CIA (1977 सीनेट सुनवाई में सामने आया) · अमेरिका · कनाडा · 1953–1973
149 उप-परियोजनाओं ने LSD, सम्मोहन, संवेदी-वंचन और बिजली के झटके से व्यवहार-नियंत्रण का अध्ययन किया, अधिकतर विषयों की जानकारी बिना; जैव-रसायनज्ञ फ्रैंक ओल्सन 1953 में नशा दिए जाने पर गिरकर मरे; निदेशक हेल्म्स ने 1973 में दस्तावेज़ नष्ट करने का आदेश दिया, पर एक गलत-फाइल गट्ठा 1977 में फिर सामने आया।
निष्कर्षअस्तित्व आधिकारिक रूप से पुष्ट; कभी कोई ‘नियंत्रणीय’ व्यक्ति बनाना सिद्ध नहीं हुआ।
स्रोत ↗
कैमरन का ‘साइकिक ड्राइविंग’ (MKUltra उप-परियोजना 68)
🏛️ आधिकारिक अभिलेख
मैकगिल का एलन मेमोरियल संस्थान · इवन कैमरन · कनाडा, मॉन्ट्रियल · 1957–1964
मनोचिकित्सक कैमरन ने दवा-प्रेरित लंबी बेहोशी, लाखों बार दोहराई टेप और भारी बिजली-झटकों से व्यक्तित्व को ‘मिटाकर फिर लिखने’ का प्रयास किया। CIA ने 1988 में अदालत-बाहर समझौता किया, कनाडा ने 1992 में पीड़ितों को मुआवज़ा दिया।
निष्कर्षकोई नियंत्रणीय व्यवहार नहीं बना; स्थायी क्षति पहुँचाई।
स्रोत ↗
डेल्गादो का रेडियो-नियंत्रित साँड़
🎓 अकादमिक शोध
येल · होसे डेल्गादो · स्पेन, कोर्दोबा का बैल-मैदान · 1963
साँड़ के पुच्छ-केंद्रक में ‘stimoceiver’ लगाकर उसके झपटते समय रिमोट दबाया तो वह वहीं रुक गया।
निष्कर्षइलेक्ट्रोड से पशु-व्यवहार नियंत्रण का उत्कृष्ट सार्वजनिक प्रदर्शन।
स्रोत ↗
ऑप्टोजेनेटिक्स और ‘झूठी स्मृति बोना’
🔬 विज्ञान द्वारा साकार
स्टैनफोर्ड/MIT · बॉयडेन आदि (2005) · रामिरेज़ व टोनेगावा (Science 2013) · अमेरिका · 2005–2013
प्रकाश से ऑप्सिन-व्यक्त न्यूरॉन नियंत्रित होते हैं; 2013 में MIT ने चूहे के हिप्पोकैम्पस में कभी न घटा डर-स्मृति ‘लिख दी’।
निष्कर्षपशु-व्यवहार और स्मृति का सटीक नियंत्रण अब नियमित शोध-उपकरण।
स्रोत ↗
प्रोजेक्ट ARTICHOKE ज्ञापन
🏛️ आधिकारिक अभिलेख
CIA (अवर्गीकृत) · अमेरिका · 1952
ज्ञापन ने सीधे पूछा: ‘क्या हम किसी व्यक्ति को इतना नियंत्रित कर सकते हैं कि वह अपनी इच्छा के विरुद्ध हमारे आदेश निभाए?’ — सम्मोहन-और-दवा वाला ‘मंचूरियन उम्मीदवार’ शोध यहीं शुरू हुआ।
निष्कर्षसफलता का कोई प्रमाण नहीं।
स्रोत ↗
‘वूडू मृत्यु’ शोध
🎓 अकादमिक शोध
हार्वर्ड शरीरक्रियाविज्ञानी वॉल्टर कैनन (American Anthropologist 1942) · अमेरिका (मामले ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका से) · 1942
‘शापित’ लोगों के दिनों में मरने के अभिलेख जुटाए, यह प्रस्ताव कि अत्यधिक भय अनुकंपी अति-सक्रियता जगाता है — आज का नोसीबो/मनोजन्य मृत्यु।
निष्कर्षघटना असली मानी, पर तंत्र मनो-शारीरिक है, जादू नहीं।
स्रोत ↗